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यूएई में वीज़ा और भर्ती का खर्च वेतन से काटना क्या कानूनी है?

यूएई के संघीय श्रम कानून के दायरे में भर्ती खर्च कर्मचारी पर नहीं डाला जा सकता, जबकि नोटिस अवधि और प्रोबेशन के भुगतान अलग प्रावधानों से तय होते हैं।

यूएई में नौकरी मिलने पर भर्ती और रोज़गार से जुड़ी प्रक्रियाओं का खर्च कर्मचारी के वेतन से वापस नहीं लिया जा सकता। संघीय श्रम कानून के दायरे में आने वाले रोज़गार में नियोक्ता को भर्ती, नौकरी के लिए यात्रा, वीज़ा जारी करने, मेडिकल जाँच और कर्मचारी की निवास अनुमति से जुड़े खर्च उठाने होते हैं। यह रोक केवल कर्मचारी से सीधे पैसे माँगने तक सीमित नहीं है; अप्रत्यक्ष वसूली भी इसके अंतर्गत आती है।

लेकिन नौकरी छोड़ते समय सामने आने वाला हर भुगतान भर्ती खर्च नहीं होता। अनुबंध की नोटिस अवधि पूरी न करने पर देय मुआवज़ा अलग विषय है। प्रोबेशन के दौरान नौकरी बदलने पर नए और पुराने नियोक्ता के बीच खर्च की भरपाई का प्रावधान भी कर्मचारी से वसूली के बराबर नहीं है। नौकरी तलाश रहे लोगों और नियोक्ताओं के लिए इन अंतरों को समझना ज़रूरी है, ताकि प्रस्ताव, अनुबंध और वेतन संबंधी बातचीत में अलग-अलग देनदारियाँ आपस में न मिलें।

नौकरी के अनुबंध और वेतन में कटौती से जुड़ी शर्तें पढ़ता कर्मचारी

भर्ती से लेकर निवास की औपचारिकताओं तक, खर्च किसका है?

संघीय डिक्री-कानून संख्या 33, वर्ष 2021 के अनुच्छेद 6 में नियोक्ता को कर्मचारी से भर्ती या रोज़गार का खर्च सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से वसूलने से रोका गया है। इसलिए यह खर्च पहले कंपनी दे और बाद में कर्मचारी के वेतन से वापस ले, तब भी वह कर्मचारी पर ही डाला गया खर्च है।

नौकरी के लिए भर्ती से जुड़े खर्च उस नियोक्ता को उठाने हैं जिसके साथ कर्मचारी का अनुबंध होना है। इनमें भर्ती प्रक्रिया, नौकरी के लिए यात्रा, वीज़ा जारी करने, मेडिकल जाँच और कर्मचारी की निवास अनुमति से जुड़े खर्च शामिल हैं। कर्मचारी के मूल देश की मान्यता प्राप्त भर्ती एजेंसी की फीस और यूएई पहुँचने के बाद की संबंधित औपचारिकताएँ भी इस ज़िम्मेदारी में आती हैं।

यह दायरा कर्मचारी की भर्ती और रोज़गार से जुड़े खर्चों का है। इसे हर तरह के व्यक्तिगत वीज़ा या परिवार के निवास संबंधी खर्च का सामान्य नियम नहीं समझना चाहिए।

वर्क परमिट और निवास अनुमति को अलग समझें

नौकरी से जुड़ी बातचीत में कई अलग प्रक्रियाओं को एक साथ ‘वीज़ा’ कह दिया जाता है। लेकिन काम करने की अनुमति और देश में रहने की अनुमति अलग विषय हैं। इस अंतर को समझने से कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों खर्च और दस्तावेज़ों पर अधिक स्पष्ट बातचीत कर सकते हैं।

अनुच्छेद 6 के अंतर्गत आने वाले रोज़गार के लिए मानव संसाधन और अमीरातीकरण मंत्रालय, यानी MOHRE, का वैध वर्क परमिट आवश्यक है। वर्क परमिट प्राप्त करने, उसके नवीनीकरण और उसे रद्द करने की प्रक्रियाएँ कार्यकारी विनियमों के अंतर्गत आती हैं। केवल निवास अनुमति को काम करने की अनुमति का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

भर्ती या रोज़गार मध्यस्थता का काम भी लाइसेंस प्राप्त संस्थाएँ ही कर सकती हैं। किसी मध्यस्थ की भागीदारी से भर्ती का खर्च कर्मचारी पर डालने की मनाही समाप्त नहीं होती।

नौकरी स्वीकार करने से पहले किन शर्तों को समझें?

यूएई आने से पहले नौकरी का प्रस्ताव स्पष्ट होना चाहिए। भर्ती एजेंट या नियोक्ता को पद, काम की ज़िम्मेदारियाँ, वेतन, लाभ और काम की परिस्थितियाँ समझानी चाहिए, ताकि कर्मचारी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करते समय उसकी शर्तों से परिचित हो।

प्रस्ताव के साथ ऐसा परिशिष्ट भी मिलना चाहिए जिसमें श्रम कानून के तहत कर्मचारी के अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ बताई गई हों। कर्मचारी नौकरी के प्रस्ताव की प्रति माँग सकता है और उसे सुरक्षित रखना उपयोगी है।

  • पद और वास्तविक काम की ज़िम्मेदारियों को समझें।
  • तय वेतन, लाभ और काम की शर्तें ध्यान से पढ़ें।
  • नोटिस अवधि और प्रोबेशन की शर्तों को भर्ती खर्च से अलग पहचानें।
  • हस्ताक्षर किए गए प्रस्ताव और उसके परिशिष्ट की प्रति रखें।

इस्तीफ़े पर माँगा गया हर भुगतान वीज़ा खर्च नहीं होता

सिर्फ नौकरी छोड़ने का निर्णय नियोक्ता को कर्मचारी से वीज़ा या भर्ती का खर्च वसूलने का अधिकार नहीं देता। फिर भी इस्तीफ़े के समय कुछ अलग कानूनी भुगतान लागू हो सकते हैं। इसलिए भुगतान की वजह समझना आवश्यक है: क्या माँग भर्ती का खर्च लौटाने की है, या अनुबंध की नोटिस अवधि पूरी न करने की?

अनुच्छेद 43 के तहत, जहाँ नोटिस अवधि के बदले मुआवज़े की देनदारी लागू होती है, कर्मचारी को सहमत नोटिस अवधि पूरी न करने पर भुगतान करना पड़ सकता है। यह दायित्व तब भी हो सकता है जब कर्मचारी के जाने से नियोक्ता को कोई प्रत्यक्ष नुकसान न हुआ हो।

नोटिस के बदले भुगतान और वीज़ा लागत की वसूली दो अलग कानूनी विषय हैं। एक की देनदारी को दूसरे की अनुमति नहीं समझना चाहिए। कर्मचारी और नियोक्ता को अंतिम भुगतान पर चर्चा करते समय इस अंतर को स्पष्ट रखना चाहिए।

प्रोबेशन में नौकरी बदलने पर खर्च किस पर आता है?

प्रोबेशन के दौरान नौकरी बदलने में अनुच्छेद 9 का एक अलग प्रावधान प्रासंगिक हो सकता है। इसके तहत नया नियोक्ता पुराने नियोक्ता को कर्मचारी की भर्ती या अनुबंध से जुड़े खर्च की भरपाई करता है, जब तक अलग सहमति न हो।

इस प्रावधान में भुगतान करने वाला पक्ष नया नियोक्ता है। नियोक्ताओं के बीच खर्च की भरपाई और कर्मचारी के वेतन से कटौती को एक ही बात मानना गलत होगा। प्रोबेशन का उल्लेख अपने आप कर्मचारी पर वीज़ा खर्च की देनदारी नहीं डालता।

इसी तरह, अनुबंध में भर्ती खर्च से जुड़ी शर्त होने भर को कर्मचारी से सीधे या अप्रत्यक्ष वसूली की सामान्य अनुमति नहीं समझना चाहिए। ऐसी शर्त को अनुच्छेद 6 की मनाही और लागू प्रोबेशन प्रावधानों से अलग करके नहीं पढ़ा जा सकता।

कर्मचारी और नियोक्ता के लिए व्यावहारिक निष्कर्ष

यदि वेतन से कोई रकम काटी जा रही है, तो बातचीत का पहला मुद्दा कटौती का वास्तविक आधार होना चाहिए। भर्ती, नौकरी के वीज़ा, मेडिकल जाँच या संबंधित निवास औपचारिकताओं का खर्च कर्मचारी से वसूलना, नोटिस अवधि के बदले देय भुगतान से अलग है। अपने नौकरी प्रस्ताव और अनुबंध की प्रति सामने रखकर इस अंतर पर बात करना अधिक उपयोगी होगा।

नियोक्ताओं के लिए भी यही स्पष्टता ज़रूरी है। भर्ती और रोज़गार संबंधी खर्च कंपनी की ज़िम्मेदारी के रूप में रखें; नोटिस अवधि की देनदारी और प्रोबेशन में नियोक्ताओं के बीच संभावित भरपाई को अलग विषय मानें। इन सभी मदों को एक साथ ‘वीज़ा खर्च’ कहने से भुगतान की वास्तविक प्रकृति अस्पष्ट हो जाती है।

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स्रोत

ज़रूरतें और प्रक्रियाएँ बदल सकती हैं। ये अतिरिक्त स्रोत आपकी स्थिति से जुड़ी नवीनतम जानकारी पाने में मदद कर सकते हैं।

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